Sunil Gavaskar Biography In Hindi | सुनील गावस्कर की जीवनी
Sunil Gavaskar Biography In Hindi में आपका स्वागत है। भारतीय क्रिकेट इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में सुनील मनोहर गावस्कर का नाम सुनहरे अक्षरों में अंकित है। उन्हें ‘लिटिल मास्टर’ के नाम से जाना जाता है और वे दुनिया के उन महानतम बल्लेबाजों में से एक हैं जिन्होंने अपने युग में टेस्ट क्रिकेट को एक नई दिशा दी। अपनी अटूट एकाग्रता, शानदार तकनीक और बिना हेलमेट के भी दुनिया के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाजों का सामना करने की क्षमता ने उन्हें एक किंवदंती बना दिया। यह लेख उनके जीवन, करियर और भारतीय क्रिकेट में उनके अमूल्य योगदान पर एक विस्तृत दृष्टि डालता है।
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परिचय

सुनील मनोहर गावस्कर, जिन्हें प्यार से ‘सनी’ कहा जाता है, भारतीय क्रिकेट के एक ऐसे स्तंभ हैं जिन्होंने कई पीढ़ियों के क्रिकेटरों को प्रेरित किया है। 1970 और 1980 के दशक में, जब वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज दुनिया पर राज कर रहे थे, तब गावस्कर बिना किसी डर के उनके सामने दीवार बनकर खड़े रहे। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज होने का गौरव हासिल किया और 34 टेस्ट शतक लगाकर एक समय में विश्व रिकॉर्ड बनाया था। उनके खेल ने न केवल भारत को गौरवान्वित किया, बल्कि क्रिकेट के इतिहास में भी एक अमिट छाप छोड़ी।
एक सलामी बल्लेबाज के रूप में, उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भारत को स्थिरता प्रदान की और अपनी शानदार तकनीक से यह साबित किया कि कद-काठी से ज्यादा महत्वपूर्ण दृढ़ संकल्प और कौशल होता है। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद, उन्होंने एक सफल कमेंटेटर, लेखक और विश्लेषक के रूप में अपना योगदान जारी रखा, जिससे उनकी आवाज और विचार आज भी खेल प्रेमियों के लिए प्रासंगिक बने हुए हैं। उनकी कहानी सिर्फ एक क्रिकेटर की नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की है जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपने देश को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
जन्म और परिवार

सुनील गावस्कर का जन्म 10 जुलाई 1949 को मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे), महाराष्ट्र में एक मध्यमवर्गीय मराठी परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम मनोहर गावस्कर था, जो एक सफल क्लब क्रिकेटर थे और क्रिकेट के बड़े प्रशंसक थे। उनकी माता का नाम मीनल गावस्कर था। सुनील के मामा, माधव मंत्री, भारत के पूर्व टेस्ट क्रिकेटर थे, जिन्होंने उन्हें क्रिकेट से जुड़ने और प्रेरित होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। माधव मंत्री भारत के लिए चार टेस्ट मैच खेले थे।
एक रोचक तथ्य यह है कि जन्म के समय, अस्पताल में नर्स की गलती के कारण सुनील गावस्कर किसी और बच्चे से बदल गए थे, लेकिन उनके चाचा नारायण मासुरेकर ने उनके कान पर एक तिल देखकर उन्हें पहचान लिया और असली बच्चे को वापस दिलवाया। यह घटना उनके जीवन की शुरुआती अनूठी घटनाओं में से एक है। क्रिकेट का जुनून उनके परिवार में गहराई से समाया हुआ था, जिसने उनके अंदर इस खेल के प्रति प्रेम और समर्पण को जन्म दिया।
शुरुआती जीवन
सुनील गावस्कर का शुरुआती जीवन मुंबई में बीता, जहाँ उन्होंने बहुत कम उम्र से ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। वे गलियों और मैदानों में अपने दोस्तों के साथ घंटों क्रिकेट खेलते थे। उनके पिता, मनोहर गावस्कर, खुद एक अच्छे क्लब क्रिकेटर थे और उन्होंने सुनील को खेल की बारीकियां सिखाईं। उनके मामा, माधव मंत्री, एक पूर्व भारतीय क्रिकेटर थे, जिन्होंने सुनील को क्रिकेट की दुनिया में कदम रखने के लिए प्रोत्साहित किया।
स्कूल के दिनों में ही उनकी प्रतिभा स्पष्ट दिखने लगी थी। वे अपने से बड़ी उम्र के खिलाड़ियों के खिलाफ भी शानदार प्रदर्शन करते थे। उनकी बल्लेबाजी तकनीक और संयम बचपन से ही असाधारण था। उनके पास स्वाभाविक रूप से गेंद को देर से खेलने और उसे टाइम करने की अद्भुत क्षमता थी। इन शुरुआती अनुभवों ने उन्हें एक मजबूत आधार प्रदान किया, जिसने उन्हें आगे चलकर एक विश्व स्तरीय बल्लेबाज बनने में मदद की। उनका बचपन क्रिकेट के इर्द-गिर्द घूमता था, जिसने उन्हें इस खेल के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण सिखाया।
शिक्षा
सुनील गावस्कर ने अपनी शुरुआती शिक्षा सेंट जेवियर्स हाई स्कूल, मुंबई से प्राप्त की। स्कूल के दिनों में ही उन्होंने क्रिकेट में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था और वे स्कूल की क्रिकेट टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य थे। स्कूल के बाद, उन्होंने एल्फिंस्टन कॉलेज, मुंबई में दाखिला लिया, जहाँ उन्होंने बी.ए. की डिग्री प्राप्त की।
कॉलेज के दौरान भी वे क्रिकेट खेलते रहे और अपनी पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी सक्रिय रहे। शिक्षा के प्रति उनका रुझान और खेल के प्रति उनका जुनून दोनों ही सराहनीय थे। उन्होंने यह साबित किया कि अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ खेल के क्षेत्र में भी महारत हासिल की जा सकती है। उनकी शिक्षा ने उन्हें एक संतुलित व्यक्तित्व प्रदान किया और उन्हें खेल के मैदान के बाहर भी सोचने और विश्लेषण करने की क्षमता दी, जो बाद में उनके कमेंट्री करियर में बहुत काम आई।
क्रिकेट करियर
सुनील गावस्कर का क्रिकेट करियर लगभग दो दशकों तक फैला रहा, जो असाधारण उपलब्धियों और अटूट रिकॉर्ड से भरा था। उन्होंने भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया और विश्व क्रिकेट में अपनी एक अलग पहचान बनाई।
घरेलू क्रिकेट
गावस्कर ने अपने घरेलू क्रिकेट करियर की शुरुआत मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) के लिए की। उन्होंने 1966-67 के रणजी ट्रॉफी सीज़न में महाराष्ट्र के खिलाफ पदार्पण किया। उनकी तकनीक और धैर्य ने जल्द ही उन्हें एक विश्वसनीय सलामी बल्लेबाज के रूप में स्थापित कर दिया। रणजी ट्रॉफी में उनके प्रदर्शन ने राष्ट्रीय चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया, और यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की सीढ़ी बनी। घरेलू क्रिकेट में उनका दबदबा स्पष्ट था, जहां उन्होंने लगातार बड़े स्कोर बनाए और अपनी टीम को कई जीत दिलाईं। यह अनुभव उन्हें अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के दबाव और चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार कर रहा था।
अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण
सुनील गावस्कर ने 1971 में वेस्टइंडीज के खिलाफ पोर्ट ऑफ स्पेन में अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की। यह पदार्पण श्रृंखला ऐतिहासिक साबित हुई, जहां उन्होंने चार टेस्ट मैचों में 774 रन बनाए, जिसमें चार शतक और तीन अर्धशतक शामिल थे। उनका यह प्रदर्शन किसी भी खिलाड़ी द्वारा अपनी पहली टेस्ट श्रृंखला में बनाए गए सर्वाधिक रनों का रिकॉर्ड था। इस श्रृंखला में उनके अद्भुत प्रदर्शन ने भारत को वेस्टइंडीज में अपनी पहली टेस्ट श्रृंखला जीतने में मदद की। इस पदार्पण ने उन्हें तुरंत ‘लिटिल मास्टर’ का उपनाम दिलाया और उन्हें विश्व क्रिकेट में एक उभरते हुए सितारे के रूप में स्थापित कर दिया।
टेस्ट करियर की उपलब्धियाँ
गावस्कर का टेस्ट करियर रिकॉर्ड-तोड़ उपलब्धियों से भरा पड़ा है। वे टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन बनाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने, जिसे उन्होंने 1987 में पाकिस्तान के खिलाफ अहमदाबाद में हासिल किया। उन्होंने अपने करियर में 34 टेस्ट शतक बनाए, जो उस समय एक विश्व रिकॉर्ड था, जिसे बाद में सचिन तेंदुलकर ने तोड़ा। उनकी बल्लेबाजी की सबसे बड़ी विशेषता खतरनाक तेज गेंदबाजों के खिलाफ बिना हेलमेट के भी अडिग खड़े रहना था। वे अपनी शानदार तकनीक, एकाग्रता और धैर्य के लिए जाने जाते थे, जिससे वे लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहते थे।
उनके कुछ यादगार प्रदर्शनों में 1971 में वेस्टइंडीज के खिलाफ उनकी पहली श्रृंखला, 1976 में वेस्टइंडीज के खिलाफ पोर्ट ऑफ स्पेन में 102 रन और 1983 में पाकिस्तान के खिलाफ चेन्नई में नाबाद 236 रन शामिल हैं, जो उनका सर्वोच्च स्कोर था। उन्होंने 125 टेस्ट मैचों में 51.12 की औसत से 10,122 रन बनाए।
वनडे करियर
सुनील गावस्कर ने 1974 में इंग्लैंड के खिलाफ लीड्स में अपना वनडे पदार्पण किया। हालांकि, टेस्ट क्रिकेट की तुलना में उनका वनडे करियर कम प्रभावशाली रहा। उन्होंने 108 वनडे मैचों में 35.13 की औसत से 3,092 रन बनाए, जिसमें एकमात्र शतक 1987 विश्व कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ आया था। वे 1983 विश्व कप विजेता टीम का हिस्सा थे, हालांकि उस टूर्नामेंट में उनका व्यक्तिगत प्रदर्शन खास नहीं रहा था। वनडे क्रिकेट में उनकी धीमी बल्लेबाजी पर अक्सर सवाल उठाए जाते थे, खासकर 1975 विश्व कप में इंग्लैंड के खिलाफ उनकी 174 गेंदों पर नाबाद 36 रनों की पारी के लिए।
कप्तानी
गावस्कर ने 47 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की, जिसमें से उन्होंने 9 में जीत हासिल की, 8 में हार का सामना किया और 30 मैच ड्रॉ रहे। उनकी कप्तानी का दौर उतार-चढ़ाव भरा रहा। उन्होंने कुछ यादगार जीत दिलाईं, लेकिन कुछ मौकों पर उन्हें अपनी टीम के प्रदर्शन के लिए आलोचना का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने 37 वनडे मैचों में भी भारत की कप्तानी की, जिसमें 14 जीत, 21 हार और 2 मैच बिना नतीजे के रहे। उनकी कप्तानी में भारत ने 1985 में वर्ल्ड चैम्पियनशिप ऑफ क्रिकेट जीता, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी।
संन्यास और उसके बाद
सुनील गावस्कर ने 1987 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया, पाकिस्तान के खिलाफ बेंगलुरु में खेला गया उनका आखिरी टेस्ट था। वनडे क्रिकेट से भी उन्होंने उसी वर्ष विश्व कप के बाद संन्यास लिया। संन्यास के बाद, उन्होंने क्रिकेट कमेंट्री और लेखन में एक सफल करियर बनाया। उनकी क्रिकेट की गहरी समझ और बोलने की कला ने उन्हें एक लोकप्रिय कमेंटेटर बना दिया। उन्होंने कई किताबें भी लिखी हैं, जिनमें ‘सनी डेज’, ‘आइडल्स’ और ‘वन-डे वंडर्स’ प्रमुख हैं। वे विभिन्न क्रिकेट प्रशासकीय भूमिकाओं में भी सक्रिय रहे हैं और अक्सर भारतीय क्रिकेट के मुद्दों पर अपनी राय देते रहते हैं।
आईपीएल करियर
सुनील गावस्कर ने अपने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट करियर को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की शुरुआत से बहुत पहले ही समाप्त कर दिया था। आईपीएल का पहला सीजन 2008 में खेला गया था, जबकि गावस्कर ने 1987 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। इसलिए, उन्होंने खिलाड़ी के रूप में किसी भी आईपीएल टीम के लिए नहीं खेला है।
हालांकि, आईपीएल युग में भी सुनील गावस्कर का योगदान अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण रहा है। वे आईपीएल के दौरान एक प्रमुख क्रिकेट कमेंटेटर और विश्लेषक के रूप में सक्रिय रहे हैं। उनकी अनुभवी टिप्पणी, खेल की गहरी समझ और खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर सटीक विश्लेषण आईपीएल मैचों को देखने वाले दर्शकों के लिए एक अलग अनुभव प्रदान करते हैं। वे अक्सर विभिन्न क्रिकेट विशेषज्ञ पैनलों में शामिल होते हैं और खेल के कई पहलुओं पर अपनी राय देते हैं। इस प्रकार, भले ही वे मैदान पर आईपीएल का हिस्सा नहीं रहे हों, लेकिन मैदान के बाहर एक विशेषज्ञ के रूप में उनका प्रभाव काफी रहा है।
रिकॉर्ड्स
सुनील गावस्कर के नाम कई ऐसे रिकॉर्ड दर्ज हैं, जिन्होंने उन्हें क्रिकेट इतिहास के महानतम बल्लेबाजों में से एक बनाया।
- टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज।
- टेस्ट क्रिकेट में 34 शतक बनाने का विश्व रिकॉर्ड (जिसे बाद में सचिन तेंदुलकर ने तोड़ा)।
- टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा बार (10) एक कैलेंडर वर्ष में 1,000 रन बनाने का रिकॉर्ड।
- दो अलग-अलग टेस्ट मैदानों पर एक पारी में दो-दो शतक बनाने वाले पहले और एकमात्र खिलाड़ी (पोर्ट ऑफ स्पेन और वानखेड़े स्टेडियम)।
- टेस्ट क्रिकेट में एक ही टीम (वेस्टइंडीज) के खिलाफ सबसे ज्यादा शतक (13) बनाने का रिकॉर्ड।
- टेस्ट क्रिकेट में सलामी बल्लेबाज के तौर पर सबसे ज्यादा शतक (33) बनाने का रिकॉर्ड।
- किसी भी पहली टेस्ट सीरीज में सबसे ज्यादा रन (774) बनाने का रिकॉर्ड (वेस्टइंडीज के खिलाफ 1971)।
- टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा बार (58) पचास या उससे अधिक रन (शतक सहित) बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज।
- टेस्ट में लगातार 100 से अधिक पारी खेलने का रिकॉर्ड (109 पारी)।
- टेस्ट इतिहास में 1000, 2000, 3000, 4000, 5000, 6000, 7000, 8000, 9000 और 10,000 रन तक पहुंचने वाले सबसे तेज भारतीय बल्लेबाज।
बल्लेबाजी आंकड़े
| प्रारूप | मैच | पारी | रन | उच्चतम स्कोर | औसत | 100 | 50 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| टेस्ट | 125 | 214 | 10122 | 236* | 51.12 | 34 | 45 |
| वनडे | 108 | 102 | 3092 | 103* | 35.13 | 1 | 27 |
पुरस्कार
सुनील गावस्कर को उनके शानदार क्रिकेट करियर और भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।
- अर्जुन पुरस्कार (1975): भारत सरकार द्वारा खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया जाने वाला यह पुरस्कार उन्हें उनके शुरुआती करियर में ही मिल गया था, जो उनकी प्रतिभा को दर्शाता है।
- पद्म भूषण (1980): भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से उन्हें सम्मानित किया गया, जो भारतीय समाज में उनके योगदान और उनकी प्रसिद्धि का प्रतीक है।
- एमसीसी मानद आजीवन सदस्यता: मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने उन्हें यह दुर्लभ सम्मान दिया, जो क्रिकेट के इतिहास में उनके कद को दर्शाता है।
- आईसीसी हॉल ऑफ फेम (2009): अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने उन्हें अपने हॉल ऑफ फेम में शामिल किया, जिससे वे क्रिकेट के दिग्गजों की सूची में शामिल हो गए।
- कर्नल सी.के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (2012): बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) ने उन्हें भारतीय क्रिकेट में उनके आजीवन योगदान के लिए इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया।
- स्पोर्ट्सपर्सन ऑफ द ईयर (1980): उन्हें विभिन्न खेल संघों द्वारा इस खिताब से भी नवाजा गया।
पत्नी / गर्लफ्रेंड
सुनील गावस्कर का विवाह 1976 में मार्शनील मेहदी से हुआ था। मार्शनील, तत्कालीन कानपुर के एक कपड़ा उद्योगपति की बेटी थीं। उनकी मुलाकात एक मैच के दौरान हुई थी और दोनों ने कुछ समय बाद शादी कर ली। मार्शनील ने सुनील के क्रिकेट करियर में एक मजबूत सहारा प्रदान किया।
इस दंपति का एक बेटा है, जिसका नाम रोहन गावस्कर है। रोहन ने भी अपने पिता की तरह क्रिकेट को अपनाया और भारत के लिए कुछ वनडे मैच खेले, साथ ही घरेलू क्रिकेट में भी उनका एक सफल करियर रहा। सुनील गावस्कर का वैवाहिक जीवन काफी स्थिर और निजी रहा है, और उन्होंने अपने परिवार को हमेशा लाइमलाइट से दूर रखा है।
नेट वर्थ
सुनील गावस्कर की अनुमानित नेट वर्थ लगभग $30 मिलियन (लगभग 250 करोड़ रुपये) है। यह आंकड़ा उनके क्रिकेट करियर, कमेंट्री, लेखन, ब्रांड एंडोर्समेंट और विभिन्न निवेशों से अर्जित की गई संपत्ति पर आधारित है।
अपने खेल के दिनों में उन्होंने भले ही आज के क्रिकेटरों जितनी कमाई न की हो, लेकिन संन्यास के बाद उनकी कमेंट्री, क्रिकेट विश्लेषण और लेखन ने उन्हें काफी आर्थिक सफलता दिलाई। वे कई ब्रांडों के एंबेसडर रहे हैं और उनके पास मुंबई और गोवा जैसे शहरों में अचल संपत्ति भी है। उनकी विशेषज्ञ राय और क्रिकेट जगत में उनकी प्रतिष्ठा उन्हें लगातार आय के अवसर प्रदान करती रहती है।
रोचक तथ्य
सुनील गावस्कर के जीवन और करियर से जुड़े कई रोचक तथ्य हैं जो उनकी अनोखी शख्सियत को दर्शाते हैं:
- जन्म के समय अदला-बदली: जन्म के समय अस्पताल में उनकी अदला-बदली हो गई थी। उनके चाचा नारायण मासुरेकर ने उनके कान पर एक तिल देखकर उन्हें पहचान लिया और सही बच्चे को वापस दिलवाया।
- ‘लिटिल मास्टर’ का उपनाम: वेस्टइंडीज के खिलाफ अपनी पहली ही टेस्ट सीरीज में धमाकेदार प्रदर्शन के बाद उन्हें यह उपनाम मिला।
- बिना हेलमेट के बल्लेबाजी: अपने पूरे करियर में, उन्होंने खतरनाक तेज गेंदबाजों के खिलाफ भी बहुत कम अवसरों पर हेलमेट पहना, जो उनके साहस और तकनीक का प्रमाण है।
- अभिनय का शौक: गावस्कर ने एक मराठी फिल्म ‘सावली प्रेमाची’ (1980) और एक हिंदी फिल्म ‘मालामाल’ (1988) में कैमियो रोल भी किया था।
- कमेंट्री में अग्रणी: संन्यास के बाद, वह भारत के पहले सफल पूर्णकालिक क्रिकेट कमेंटेटर में से एक बने। उनकी आवाज दशकों से क्रिकेट प्रेमियों के लिए जानी-पहचानी है।
- वेस्टइंडीज के खिलाफ अद्भुत प्रदर्शन: वेस्टइंडीज के खिलाफ उनका प्रदर्शन हमेशा शानदार रहा। उन्होंने उनके खिलाफ 13 टेस्ट शतक बनाए, जो किसी भी बल्लेबाज द्वारा एक टीम के खिलाफ बनाए गए सर्वाधिक शतकों में से एक है।
- शुरुआती दिनों में फुटबॉल का जुनून: क्रिकेट से पहले, उन्हें फुटबॉल का भी शौक था और वे एक अच्छे फुटबॉलर भी थे।
- अंपायरिंग पर टिप्पणी: उन्होंने एक बार अंपायरों के खराब फैसलों के विरोध में अपनी टीम को मैदान छोड़ने का संकेत दिया था, हालांकि बाद में उन्हें शांत कर दिया गया।
सामान्य प्रश्न (FAQs)
सुनील गावस्कर का उपनाम क्या है?
सुनील गावस्कर का सबसे प्रसिद्ध उपनाम ‘लिटिल मास्टर’ है। उन्हें यह उपनाम वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने पदार्पण श्रृंखला में शानदार प्रदर्शन के बाद मिला था।
सुनील गावस्कर ने टेस्ट क्रिकेट में कितने शतक लगाए हैं?
सुनील गावस्कर ने अपने टेस्ट करियर में कुल 34 शतक लगाए हैं। वह टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन बनाने वाले और 34 शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज थे, जो एक समय विश्व रिकॉर्ड था।
क्या सुनील गावस्कर ने विश्व कप जीता है?
जी हाँ, सुनील गावस्कर 1983 की भारतीय टीम के सदस्य थे जिसने कपिल देव की कप्तानी में अपना पहला क्रिकेट विश्व कप जीता था।
सुनील गावस्कर ने क्रिकेट से कब संन्यास लिया?
सुनील गावस्कर ने 1987 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया। उनका आखिरी टेस्ट मैच पाकिस्तान के खिलाफ बेंगलुरु में और आखिरी वनडे मैच उसी साल विश्व कप में था।
सुनील गावस्कर के बेटे का नाम क्या है और क्या वह क्रिकेटर है?
सुनील गावस्कर के बेटे का नाम रोहन गावस्कर है। उन्होंने भी क्रिकेट खेला है और भारत के लिए कुछ वनडे मैचों में प्रतिनिधित्व किया है, साथ ही घरेलू क्रिकेट में एक सफल करियर रहा है।
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