Rahul Dravid Biography In Hindi | राहुल द्रविड़ की जीवनी
Rahul Dravid Biography In Hindi में, हम भारतीय क्रिकेट के उस महान स्तंभ की जीवन यात्रा पर प्रकाश डालेंगे, जिसे ‘द वॉल’ के नाम से जाना जाता है। राहुल द्रविड़, एक ऐसा नाम जो धैर्य, दृढ़ता और अद्वितीय खेल भावना का प्रतीक है। उनका करियर सिर्फ आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि क्रिकेट के प्रति समर्पण, कड़ी मेहनत और टीम-फर्स्ट मानसिकता की एक मिसाल है। इस लेख में, हम उनके जन्म से लेकर उनके स्वर्णिम करियर, रिकॉर्ड्स, पुरस्कारों और निजी जीवन तक, हर पहलू को विस्तार से जानेंगे। द्रविड़ का भारतीय क्रिकेट में योगदान अतुलनीय रहा है, चाहे वह एक खिलाड़ी के रूप में हो, कप्तान के रूप में हो या फिर अब एक कोच के रूप में।
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जन्म और परिवार
राहुल द्रविड़ का जन्म 11 जनवरी 1973 को मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में एक मराठी परिवार में हुआ था। उनके पिता, शरद द्रविड़, किसान जामुन के लिए काम करते थे, जो एक जैम और सिरप बनाने वाली कंपनी थी, और यहीं से राहुल को उनका प्रसिद्ध उपनाम ‘जैमी’ मिला। उनकी माँ, पुष्पा द्रविड़, बेंगलुरु विश्वविद्यालय में कला की प्रोफेसर थीं। राहुल के परिवार में उनके एक छोटे भाई, विजय द्रविड़ भी हैं।
जन्म के कुछ समय बाद ही उनका परिवार कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में बस गया। यहीं पर राहुल का बचपन बीता और क्रिकेट के प्रति उनका रुझान विकसित हुआ। उनके माता-पिता ने हमेशा उनके क्रिकेट के जुनून को प्रोत्साहित किया और उन्हें अपनी पढ़ाई के साथ-साथ खेल में भी उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। द्रविड़ का परिवार हमेशा उन्हें जमीन से जोड़े रखने में सहायक रहा है, और यही सादगी और विनम्रता उनके पूरे करियर में उनके व्यक्तित्व का हिस्सा रही।
शुरुआती जीवन

राहुल द्रविड़ का शुरुआती जीवन बेंगलुरु में एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार में बीता। उनका क्रिकेट के प्रति प्रेम बचपन में ही दिखने लगा था। उन्होंने मात्र 12 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था और जल्द ही अपनी प्रतिभा से अपने कोचों को प्रभावित किया। सेंट जोसेफ बॉयज हाई स्कूल में पढ़ते हुए, उन्होंने स्कूल स्तर पर क्रिकेट में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उनके पहले कोच के.सी. श्रीकांत थे, जिन्होंने राहुल की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें सही दिशा दी।
बचपन में राहुल सिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं, बल्कि विकेटकीपिंग भी करते थे। यह बहुमुखी प्रतिभा उनके करियर में आगे चलकर बहुत काम आई, खासकर एकदिवसीय क्रिकेट में जब उन्होंने टीम की जरूरत के अनुसार विकेटकीपर की भूमिका भी निभाई। उन्होंने स्कूल और जूनियर स्तर पर लगातार रन बनाए, जिससे उन्हें कर्नाटक की अंडर-15, अंडर-17 और अंडर-19 टीमों में जगह मिली। उनके शुरुआती प्रदर्शन ने यह साफ कर दिया था कि वे भविष्य में एक बड़े क्रिकेटर बनने वाले हैं। उनके सहपाठियों और शिक्षकों को भी उनकी एकाग्रता और कड़ी मेहनत से काफी उम्मीदें थीं, जो उनके खेल में साफ झलकती थी।
शिक्षा
राहुल द्रविड़ अपनी शिक्षा को लेकर भी काफी गंभीर थे, और उन्होंने कभी भी क्रिकेट के लिए अपनी पढ़ाई का त्याग नहीं किया। उन्होंने बेंगलुरु के प्रतिष्ठित सेंट जोसेफ बॉयज हाई स्कूल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। स्कूल के बाद, उन्होंने सेंट जोसेफ कॉलेज ऑफ कॉमर्स में प्रवेश लिया, जहाँ उन्होंने वाणिज्य की पढ़ाई की। उन्होंने बैचलर ऑफ कॉमर्स (B.Com) की डिग्री प्राप्त की।
क्रिकेट और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना उनके लिए हमेशा एक चुनौती रहा, लेकिन द्रविड़ ने अपनी अनुशासन और समय प्रबंधन की क्षमता से दोनों को बखूबी संभाला। उनके कॉलेज के दिनों में भी वे कर्नाटक के लिए घरेलू क्रिकेट खेल रहे थे, फिर भी उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की। यह उनकी एकाग्रता और प्रतिबद्धता का एक और प्रमाण था, जो उनके खेल करियर में भी दिखाई दिया। द्रविड़ अक्सर कहते थे कि शिक्षा ने उन्हें एक संतुलित दृष्टिकोण और जीवन के प्रति व्यावहारिक समझ दी, जो उन्हें क्रिकेट के मैदान पर दबाव भरे पलों में निर्णय लेने में भी मदद करती थी।
क्रिकेट करियर
घरेलू क्रिकेट
राहुल द्रविड़ का घरेलू क्रिकेट करियर 1990-91 के रणजी ट्रॉफी सीजन में शुरू हुआ, जब उन्होंने 17 साल की उम्र में कर्नाटक के लिए पदार्पण किया। उन्होंने अपने पहले रणजी ट्रॉफी मैच में गोवा के खिलाफ 82 रन बनाए। जल्द ही, वे कर्नाटक टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य बन गए और लगातार रन बनाने लगे। 1995-96 रणजी ट्रॉफी सीजन में, उन्होंने 85.00 की औसत से 700 से अधिक रन बनाए, जिसमें दो शतक शामिल थे। इस शानदार प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने में मदद की। घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन हमेशा बेजोड़ रहा, जो उनकी मजबूत तकनीक और धैर्य का प्रमाण था।
अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण
राहुल द्रविड़ ने अपना एकदिवसीय अंतर्राष्ट्रीय (ODI) पदार्पण 3 अप्रैल 1996 को सिंगापुर में श्रीलंका के खिलाफ किया, लेकिन वह इस मैच में ज्यादा प्रभाव नहीं डाल पाए और केवल 3 रन बनाकर आउट हो गए। हालांकि, उन्हें जल्द ही टेस्ट टीम में भी मौका मिला।
उन्होंने अपना टेस्ट पदार्पण 20 जून 1996 को लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ किया। यह मैच सौरव गांगुली के पदार्पण के लिए भी प्रसिद्ध था, जिन्होंने शतक बनाया था। द्रविड़ ने भी अपने पदार्पण मैच में शानदार प्रदर्शन किया, 95 रन बनाकर शतक से चूक गए, लेकिन उन्होंने अपनी ठोस तकनीक और धैर्य से क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। उनके इस प्रदर्शन ने भारतीय क्रिकेट में ‘द वॉल’ के युग की शुरुआत का संकेत दिया।
टेस्ट करियर
राहुल द्रविड़ का टेस्ट करियर भारतीय क्रिकेट के इतिहास में सबसे शानदार और प्रभावशाली में से एक है। उन्हें अक्सर ‘द वॉल’ कहा जाता है, जो उनकी अटूट एकाग्रता, दृढ़ता और किसी भी परिस्थिति में क्रीज पर टिके रहने की क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने अपने करियर में 164 टेस्ट मैच खेले और 52.31 की औसत से 13,288 रन बनाए, जिसमें 36 शतक और 63 अर्द्धशतक शामिल हैं। वह टेस्ट क्रिकेट में चौथे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं।
- उन्होंने 2003 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में 233 रन की ऐतिहासिक पारी खेली, जिससे भारत को ऑस्ट्रेलिया में 23 साल बाद टेस्ट मैच जीतने में मदद मिली।
- उन्होंने 2004 में पाकिस्तान के खिलाफ रावलपिंडी में 270 रन का अपना सर्वोच्च टेस्ट स्कोर बनाया।
- वह टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन बनाने वाले कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों में से एक हैं।
- उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा कैच लेने का रिकॉर्ड भी बनाया है (210 कैच)।
- द्रविड़ ऐसे एकमात्र खिलाड़ी हैं जिन्होंने सभी 10 टेस्ट खेलने वाले देशों में शतक बनाए हैं।
उनकी बल्लेबाजी शैली तकनीकी रूप से सही थी, जिसमें मजबूत डिफेंस और शानदार ड्राइव शामिल थे। वे विपरीत परिस्थितियों में टीम को संकट से निकालने में माहिर थे और अक्सर अकेले दम पर मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते थे।

वनडे करियर
टेस्ट में अपनी दृढ़ता के लिए जाने जाने वाले राहुल द्रविड़ ने एकदिवसीय क्रिकेट में भी अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। उन्होंने 344 एकदिवसीय मैच खेले और 39.16 की औसत से 10,889 रन बनाए, जिसमें 12 शतक और 83 अर्द्धशतक शामिल हैं। वह एकदिवसीय क्रिकेट में 10,000 रन बनाने वाले छठे बल्लेबाज थे।
वनडे में, द्रविड़ ने मध्य क्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने टीम की जरूरत के अनुसार विकेटकीपिंग की भूमिका भी निभाई, जिससे टीम को एक अतिरिक्त बल्लेबाज खिलाने का मौका मिला। उन्होंने 1999 विश्व कप में 461 रन बनाए, जो उस टूर्नामेंट में सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी थे।
- उन्होंने 83 एकदिवसीय अर्द्धशतक बनाए हैं, जो भारतीय रिकॉर्ड है।
- वे एकदिवसीय इतिहास में सबसे ज्यादा शतकीय साझेदारी में शामिल रहे हैं।
- उन्होंने 1999 विश्व कप में दो शतकीय साझेदारियां कीं, जिनमें सौरव गांगुली के साथ 318 रन की विश्व रिकॉर्ड साझेदारी भी शामिल थी।
उनकी वनडे बल्लेबाजी टेस्ट जितनी तेज नहीं थी, लेकिन उनकी निरंतरता और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता उन्हें टीम के लिए एक अमूल्य संपत्ति बनाती थी।
टी20 करियर
राहुल द्रविड़ ने अपने करियर के अंतिम चरण में केवल एक अंतर्राष्ट्रीय टी20 मैच खेला। यह मैच 2011 में इंग्लैंड के खिलाफ था। इस मैच में उन्होंने 31 रन बनाए, जिसमें लगातार तीन छक्के भी शामिल थे, जिससे पता चला कि वे छोटे प्रारूप में भी आक्रामक बल्लेबाजी करने में सक्षम थे, हालांकि उन्हें इस प्रारूप में खेलने के ज्यादा मौके नहीं मिले। आईपीएल में उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और राजस्थान रॉयल्स के लिए खेला और अपने अनुभव से टीम का मार्गदर्शन किया।
कप्तान के रूप में
राहुल द्रविड़ ने 2005 से 2007 तक भारतीय टेस्ट और एकदिवसीय टीम की कप्तानी की। उनकी कप्तानी में भारत ने कई महत्वपूर्ण जीत हासिल कीं।
- उनकी कप्तानी में भारत ने 2006 में वेस्टइंडीज में 35 साल बाद टेस्ट सीरीज जीती।
- उन्होंने 2007 में इंग्लैंड में टेस्ट सीरीज जीती, जो 1986 के बाद पहली बार था।
- उनकी कप्तानी में भारत ने लगातार 14 एकदिवसीय मैच जीतने का रिकॉर्ड बनाया।
- उन्होंने 2007 विश्व कप में भारत की कप्तानी की, हालांकि टीम ग्रुप स्टेज से बाहर हो गई थी, जो उनके करियर का एक निराशाजनक क्षण था।
एक कप्तान के रूप में, द्रविड़ अपनी शांत और संयमित प्रकृति के लिए जाने जाते थे। वे हमेशा खिलाड़ियों को प्रेरित करते थे और टीम वर्क पर जोर देते थे। भले ही उनकी कप्तानी में कुछ उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने हमेशा टीम के हित को सर्वोपरि रखा।
कोचिंग करियर
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद, राहुल द्रविड़ ने कोचिंग में कदम रखा और भारतीय क्रिकेट के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- वह 2016 और 2018 में अंडर-19 विश्व कप में भारतीय टीम के कोच थे। 2018 में, उनकी कोचिंग में भारत ने पृथ्वी शॉ की कप्तानी में अंडर-19 विश्व कप जीता।
- उन्होंने भारत ए टीम के कोच के रूप में भी काम किया और कई युवा प्रतिभाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए तैयार किया।
- 2019 में, उन्हें बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (NCA) का प्रमुख नियुक्त किया गया, जहाँ उन्होंने भारत की बेंच स्ट्रेंथ को मजबूत करने और युवा प्रतिभाओं को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- नवंबर 2021 में, उन्हें भारतीय सीनियर पुरुष क्रिकेट टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया, जहाँ वे वर्तमान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
एक कोच के रूप में, द्रविड़ अपनी शांत और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं। वे युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हैं और उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाने पर जोर देते हैं। उनका कोचिंग करियर भी उनके खेल करियर की तरह ही प्रभावशाली रहा है, जिससे भारतीय क्रिकेट को एक नई दिशा मिली है।
संन्यास
राहुल द्रविड़ ने 2012 में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की। उन्होंने 9 मार्च 2012 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने संन्यास की घोषणा की, जिससे क्रिकेट जगत में भावुक लहर दौड़ गई। उन्होंने अपने संन्यास के बाद भी आईपीएल और घरेलू क्रिकेट में खेलना जारी रखा, लेकिन 2013 में इंडियन प्रीमियर लीग से भी संन्यास ले लिया। उनके संन्यास के बाद, भारतीय क्रिकेट में ‘द वॉल’ की जगह भरना एक बड़ी चुनौती रही। हालांकि, उनके संन्यास ने उन्हें कोचिंग और युवा खिलाड़ियों के विकास पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर दिया, जहां उन्होंने एक नई विरासत बनाई।
आईपीएल करियर
राहुल द्रविड़ ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के शुरुआती सीज़न में भी अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने 2008 में उद्घाटन सीज़न में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) की कप्तानी की। बाद में, वे राजस्थान रॉयल्स (RR) में शामिल हो गए, जहाँ उन्होंने एक खिलाड़ी और कप्तान के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (2008-2010): राहुल द्रविड़ आरसीबी के पहले कप्तान थे। हालांकि, टीम उनके नेतृत्व में कोई बड़ी सफलता हासिल नहीं कर पाई, लेकिन उन्होंने अपने अनुभव से युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन किया।
- राजस्थान रॉयल्स (2011-2013): राजस्थान रॉयल्स में शामिल होने के बाद, उन्होंने एक अनुभवी बल्लेबाज और कप्तान के रूप में टीम को स्थिरता प्रदान की। उनकी कप्तानी में, राजस्थान रॉयल्स ने 2013 में प्लेऑफ तक का सफर तय किया।
आईपीएल में, द्रविड़ ने अपनी क्लासिक बल्लेबाजी शैली को बनाए रखा, लेकिन उन्होंने टी20 प्रारूप की जरूरतों के अनुसार अपनी बल्लेबाजी में कुछ बदलाव भी किए। उन्होंने आईपीएल में कुल 89 मैच खेले और 28.23 की औसत और 115.52 के स्ट्राइक रेट से 2174 रन बनाए, जिसमें 11 अर्द्धशतक शामिल हैं। उनके आईपीएल करियर का एक और महत्वपूर्ण पहलू उनका अनुभव साझा करना और युवा खिलाड़ियों को मेंटर करना था, जिसने कई भारतीय क्रिकेटरों के करियर को आकार दिया।
रिकॉर्ड्स
राहुल द्रविड़ के करियर में कई ऐसे रिकॉर्ड्स हैं, जो उनकी अद्वितीय प्रतिभा और दृढ़ता को दर्शाते हैं:
- टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक कैच: एक गैर-विकेटकीपर के रूप में 210 कैच।
- सभी 10 टेस्ट खेलने वाले देशों में शतक: एकमात्र क्रिकेटर जिन्होंने टेस्ट खेलने वाले सभी 10 देशों में शतक बनाए हैं।
- टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक गेंदे खेलीं: उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 31,258 गेंदें खेलीं, जो किसी भी बल्लेबाज द्वारा खेली गई गेंदों की सर्वाधिक संख्या है।
- टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक समय क्रीज पर बिताया: उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 44,152 मिनट (735 घंटे से अधिक) क्रीज पर बिताए, जो एक विश्व रिकॉर्ड है।
- एकदिवसीय क्रिकेट में शतकीय साझेदारियों में शामिल: सचिन तेंदुलकर के साथ मिलकर एकदिवसीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतकीय साझेदारियां (10) की हैं।
- दो बार एकदिवसीय में 300+ रन की साझेदारी में शामिल: एकदिवसीय क्रिकेट में दो बार 300+ रन की साझेदारी में शामिल होने वाले एकमात्र खिलाड़ी (सौरव गांगुली के साथ 318 रन और सचिन तेंदुलकर के साथ 331 रन)।
- टेस्ट में लगातार 173 पारियों तक शून्य पर आउट न होने का रिकॉर्ड: यह एक अविश्वसनीय रिकॉर्ड है जो उनकी एकाग्रता और तकनीकी दक्षता को दर्शाता है।
- ICC विश्व कप 1999 में सर्वाधिक रन: 461 रन के साथ टूर्नामेंट के अग्रणी रन-स्कोरर थे।
यहाँ उनके कुछ प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय रिकॉर्ड्स का सारणीबद्ध रूप है:
| फॉर्मेट | मैच | रन | सर्वोच्च स्कोर | औसत | शतक | अर्द्धशतक |
|---|---|---|---|---|---|---|
| टेस्ट | 164 | 13,288 | 270 | 52.31 | 36 | 63 |
| वनडे | 344 | 10,889 | 153 | 39.16 | 12 | 83 |
| टी20ई | 1 | 31 | 31 | 31.00 | 0 | 0 |
पुरस्कार
राहुल द्रविड़ को उनके शानदार क्रिकेट करियर और भारतीय क्रिकेट में योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है:
- अर्जुन पुरस्कार (Arjuna Award): 1998 में भारत सरकार द्वारा।
- पद्म श्री (Padma Shri): 2004 में भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित।
- पद्म भूषण (Padma Bhushan): 2013 में भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित।
- आईसीसी प्लेयर ऑफ द ईयर (ICC Player of the Year): 2004 में, उन्होंने यह प्रतिष्ठित पुरस्कार जीता, साथ ही उसी वर्ष आईसीसी टेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर का पुरस्कार भी जीता।
- विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर (Wisden Cricketer of the Year): 2000 में, उन्हें विजडन के पांच क्रिकेटरों में से एक नामित किया गया।
- एमआरएफ पॉली उमरीगर पुरस्कार (MRF Polly Umrigar Award): 2010-11 में बीसीसीआई द्वारा सर्वश्रेष्ठ अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर के लिए।
- आईसीसी हॉल ऑफ फेम (ICC Hall of Fame): 2018 में, उन्हें आईसीसी हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया, यह सम्मान पाने वाले वे पांचवें भारतीय क्रिकेटर थे।
इन पुरस्कारों से स्पष्ट होता है कि राहुल द्रविड़ को न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट समुदाय में भी कितना सम्मान दिया जाता है। उनकी विनम्रता और खेल भावना ने उन्हें हमेशा एक आदर्श खिलाड़ी और व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया।
पत्नी / गर्लफ्रेंड
राहुल द्रविड़ की पत्नी का नाम डॉ. विजेता पेंढारकर है। विजेता एक सर्जन हैं। यह जोड़ी 4 मई 2003 को एक निजी समारोह में विवाह बंधन में बंधी। यह शादी महाराष्ट्रियन रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी, क्योंकि दोनों ही महाराष्ट्रियन पृष्ठभूमि से आते हैं।
राहुल और विजेता के दो बेटे हैं: समित द्रविड़ (जन्म 2005) और अन्वय द्रविड़ (जन्म 2009)। समित भी अपने पिता की तरह क्रिकेट खेल रहे हैं और जूनियर स्तर पर शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। विजेता अक्सर राहुल के साथ उनके दौरों पर जाती थीं, और उन्होंने हमेशा राहुल के व्यस्त क्रिकेट करियर में उनका समर्थन किया। वे एक बहुत ही निजी व्यक्ति हैं और सार्वजनिक जीवन से दूर रहना पसंद करती हैं, जिससे राहुल को अपने परिवार के साथ शांतिपूर्ण जीवन जीने में मदद मिलती है। राहुल द्रविड़ अक्सर अपनी पत्नी को अपने जीवन की सबसे बड़ी ताकत और प्रेरणा स्रोत मानते हैं।
नेट वर्थ
राहुल द्रविड़ की अनुमानित नेट वर्थ लगभग 35 मिलियन डॉलर (लगभग 290 करोड़ रुपये) है। उनकी आय के मुख्य स्रोतों में क्रिकेट खेलना, बीसीसीआई से वेतन, विज्ञापन और ब्रांड एंडोर्समेंट, और कोचिंग से होने वाली आय शामिल है।
- बीसीसीआई से आय: भारतीय टीम के मुख्य कोच के रूप में, उनका वेतन काफी अच्छा है।
- ब्रांड एंडोर्समेंट: अपने पूरे करियर में, द्रविड़ कई बड़े ब्रांड्स जैसे रीबॉक, पेप्सी, कैडबरी, सफोला, जिलेट, क्रेड (CRED) आदि के साथ जुड़े रहे हैं। उनकी स्वच्छ छवि और विश्वसनीय व्यक्तित्व ने उन्हें ब्रांड एंबेसडर के रूप में बेहद लोकप्रिय बनाया।
- निवेश: उन्होंने विभिन्न संपत्तियों और अन्य निवेशों में भी पैसा लगाया है।
- अन्य स्रोत: कमेंट्री और विभिन्न क्रिकेट विश्लेषक के रूप में भी उन्होंने काम किया है।
द्रविड़ की वित्तीय स्थिति उनके लंबे और सफल करियर का परिणाम है। हालांकि, वे हमेशा एक साधारण जीवन जीना पसंद करते हैं और अपनी दौलत का प्रदर्शन नहीं करते हैं। उनकी नेट वर्थ उनकी मेहनत, ईमानदारी और क्रिकेट के प्रति समर्पण का प्रमाण है।
रोचक तथ्य
राहुल द्रविड़ के बारे में कुछ ऐसे रोचक तथ्य हैं, जो उन्हें एक अद्वितीय व्यक्तित्व बनाते हैं:
- उपनाम ‘जैमी’: उन्हें उनके पिता की कंपनी, किसान जामुन के कारण ‘जैमी’ उपनाम मिला। यह उपनाम उनके सहकर्मियों और दोस्तों के बीच काफी लोकप्रिय है।
- बचपन में विकेटकीपर: अपने शुरुआती दिनों में, द्रविड़ एक विकेटकीपर-बल्लेबाज थे। उन्होंने एकदिवसीय क्रिकेट में भारतीय टीम के लिए कई बार विकेटकीपिंग भी की, जिससे टीम को संतुलन बनाने में मदद मिली।
- गोल्फ के शौकीन: राहुल द्रविड़ गोल्फ खेलना बहुत पसंद करते हैं और अक्सर अपने खाली समय में गोल्फ कोर्स पर देखे जाते हैं।
- शांत और संयमित स्वभाव: उन्हें क्रिकेट इतिहास के सबसे शांत और संयमित खिलाड़ियों में से एक माना जाता है। मैदान पर उनकी एकाग्रता और शांत स्वभाव उन्हें ‘द वॉल’ के उपनाम के लिए एकदम उपयुक्त बनाता है।
- पढ़ाई में भी अव्वल: उन्होंने अपनी बैचलर ऑफ कॉमर्स की डिग्री पूरी की और यहां तक कि एमबीए की पढ़ाई भी शुरू की, हालांकि क्रिकेट करियर के कारण उन्हें इसे छोड़ना पड़ा।
- विभिन्न भाषाओं के जानकार: राहुल द्रविड़ कन्नड़, मराठी, हिंदी और अंग्रेजी में धाराप्रवाह बात कर सकते हैं।
- फेयरप्ले के प्रतीक: उन्हें क्रिकेट के ‘जेंटलमैन’ के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अपने पूरे करियर में हमेशा खेल भावना का सम्मान किया और कभी भी किसी विवाद में शामिल नहीं हुए।
- अंपायर के फैसले का सम्मान: वे उन कुछ खिलाड़ियों में से एक थे जो अक्सर अंपायर के फैसले का इंतजार किए बिना ही पवेलियन लौट जाते थे, अगर उन्हें लगता था कि वे आउट हैं।
- विजडन द्वारा दूसरा सबसे महान टेस्ट बल्लेबाज: 2012 में, विजडन इंडिया ने उन्हें सचिन तेंदुलकर के बाद दूसरा सबसे महान भारतीय टेस्ट बल्लेबाज घोषित किया था।
सामान्य प्रश्न (FAQs)
राहुल द्रविड़ का उपनाम क्या है?
राहुल द्रविड़ को उनके धैर्य, दृढ़ता और क्रीज पर लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता के कारण ‘द वॉल’ (The Wall) के उपनाम से जाना जाता है। इसके अतिरिक्त, उन्हें उनके पिता की कंपनी के उत्पाद ‘किसान जामुन’ से प्रेरित होकर ‘जैमी’ (Jammy) भी कहा जाता है।
राहुल द्रविड़ का टेस्ट डेब्यू कब हुआ था?
राहुल द्रविड़ ने अपना टेस्ट डेब्यू 20 जून 1996 को इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर किया था। अपने पहले ही टेस्ट मैच में उन्होंने 95 रन की शानदार पारी खेली थी।
राहुल द्रविड़ ने अपने करियर में कितने टेस्ट शतक बनाए हैं?
राहुल द्रविड़ ने अपने शानदार टेस्ट करियर में कुल 36 शतक बनाए हैं। वह टेस्ट क्रिकेट में भारत के लिए दूसरे सबसे ज्यादा शतक बनाने वाले बल्लेबाज हैं, सचिन तेंदुलकर के बाद।
राहुल द्रविड़ की पत्नी का नाम क्या है और उनके कितने बच्चे हैं?
राहुल द्रविड़ की पत्नी का नाम डॉ. विजेता पेंढारकर है, जो एक सर्जन हैं। उनके दो बेटे हैं, जिनका नाम समित द्रविड़ और अन्वय द्रविड़ है।
क्या राहुल द्रविड़ ने कभी आईपीएल जीता है?
एक खिलाड़ी या कप्तान के रूप में राहुल द्रविड़ ने कभी इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का खिताब नहीं जीता है। उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और राजस्थान रॉयल्स के लिए खेला, लेकिन उनकी टीमों ने कभी ट्रॉफी नहीं जीती। हालांकि, उनके नेतृत्व में राजस्थान रॉयल्स ने 2013 में प्लेऑफ तक का सफर तय किया था।
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