Virender Sehwag Biography In Hindi | वीरेंद्र सहवाग की जीवनी
Virender Sehwag Biography In Hindi: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कुछ ही ऐसे खिलाड़ी हुए हैं जिन्होंने अपने अद्वितीय खेल शैली से क्रिकेट के पूरे परिदृश्य को बदल दिया। इन्हीं में से एक हैं नजफगढ़ के नवाब, वीरेंद्र सहवाग। अपनी निडर बल्लेबाजी, अपरंपरागत शैली और हर प्रारूप में एक ही तरह के आक्रामक दृष्टिकोण के लिए जाने जाने वाले सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट में सलामी बल्लेबाजी की परिभाषा ही बदल दी। उनके बल्ले से निकले हर शॉट में आत्मविश्वास और मनोरंजन का एक अनूठा संगम होता था। यह लेख आपको इस महान क्रिकेटर के जीवन, उनके करियर की ऊंचाइयों और उनसे जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करेगा।
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जन्म और परिवार

वीरेंद्र सहवाग का जन्म 20 अक्टूबर 1978 को दिल्ली के नजफगढ़ में एक जाट परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम किशन सहवाग और माता का नाम कृष्णा सहवाग है। सहवाग अपने माता-पिता के चार बच्चों में से एक हैं, उनके दो बड़ी बहनें, मंजू और अंजू, और एक छोटा भाई विनोद है। उनका परिवार अनाज का व्यापार करता था। सहवाग का बचपन नजफगढ़ की गलियों में बीता, जहाँ उन्होंने छोटी उम्र से ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। उनके परिवार का क्रिकेट से कोई सीधा संबंध नहीं था, लेकिन वीरेंद्र की क्रिकेट के प्रति दीवानगी इतनी प्रबल थी कि उन्होंने सभी बाधाओं को पार कर अपने सपने को पूरा किया। उनके पिता ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित किया, जबकि शुरुआती दौर में उनकी माँ क्रिकेट को लेकर थोड़ी आशंकित थीं।
शुरुआती जीवन
वीरेंद्र सहवाग का बचपन नजफगढ़ के धूल भरे मैदानों में क्रिकेट खेलते हुए बीता। छोटी उम्र से ही उनके अंदर क्रिकेट का जुनून कूट-कूट कर भरा था। अक्सर वह अपने दोस्तों के साथ टेनिस बॉल से क्रिकेट खेला करते थे और बड़े-बड़े छक्के मारने की कोशिश करते थे। एक बार खेलते समय उन्हें चोट लग गई थी, जिसके बाद उनकी माँ ने उन्हें क्रिकेट खेलने से मना कर दिया था। लेकिन सहवाग ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने पिता किशन सहवाग को मना लिया, जिन्होंने उनकी प्रतिभा को देखा और उनका समर्थन किया। सहवाग ने दिल्ली के वेस्ट एंड एकेडमी में क्रिकेट कोचिंग लेना शुरू किया, जहाँ उन्हें कोच अमर नाथ शर्मा का मार्गदर्शन मिला। शर्मा जी ने सहवाग की प्राकृतिक आक्रामक शैली को पहचाना और उसे निखारने पर जोर दिया, बजाय इसके कि उसे किसी पारंपरिक ढांचे में ढालें। सहवाग ने कड़ी मेहनत की और जल्द ही दिल्ली के युवा क्रिकेट सर्किट में अपनी पहचान बना ली। उनकी निडरता और हर गेंद को हिट करने की इच्छा बचपन से ही उनके खेल का एक अभिन्न अंग थी।
शिक्षा
वीरेंद्र सहवाग ने अपनी शुरुआती शिक्षा दिल्ली के अरेंज विद्या भवन स्कूल से प्राप्त की। स्कूल के दिनों से ही उनकी क्रिकेट में गहरी रुचि थी, और उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट को भी पूरा समय दिया। स्कूल के बाद, उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में दाखिला लिया, जहाँ से उन्होंने बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री प्राप्त की। हालांकि, उनकी प्राथमिकताओं में हमेशा क्रिकेट ही रहा। वह अकादमिक रूप से औसत छात्र थे, लेकिन खेल के मैदान पर उनकी असाधारण प्रतिभा ने उन्हें हमेशा अलग पहचान दी। सहवाग ने अपनी शिक्षा को कभी भी अपने क्रिकेट करियर के आड़े नहीं आने दिया, और एक संतुलन बनाए रखा। उन्होंने हमेशा माना कि शिक्षा जीवन के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन उनका असली जुनून और करियर क्रिकेट में ही था।
क्रिकेट करियर
घरेलू करियर
वीरेंद्र सहवाग ने 1997-98 सीज़न में दिल्ली के लिए फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में पदार्पण किया। उन्होंने अपने शुरुआती मैचों में ही अपनी आक्रामक बल्लेबाजी का प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था। रणजी ट्रॉफी में उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। शुरुआत में उन्हें मध्य क्रम के बल्लेबाज के रूप में जाना जाता था, लेकिन बाद में उन्होंने सलामी बल्लेबाज के रूप में अपनी जगह पक्की की और भारतीय घरेलू क्रिकेट में एक प्रमुख नाम बन गए। उनका दमदार प्रदर्शन ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनके प्रवेश का मार्ग प्रशस्त करने वाला था।
अंतर्राष्ट्रीय पदार्पण
- वनडे पदार्पण: सहवाग ने 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ अपना एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय (ODI) पदार्पण किया। पहले मैच में वह केवल 1 रन बनाकर आउट हो गए और गेंदबाजी में भी कोई विकेट नहीं ले पाए। उन्हें टीम से ड्रॉप कर दिया गया, लेकिन उन्होंने घरेलू क्रिकेट में कड़ी मेहनत की और जोरदार वापसी की।
- टेस्ट पदार्पण: मार्च 2001 में, सहवाग ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया। अपने पहले टेस्ट मैच में, उन्होंने मध्य क्रम में बल्लेबाजी करते हुए शतक (105 रन) जड़कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। यह एक शानदार शुरुआत थी, और यहीं से उनके महान टेस्ट करियर की नींव रखी गई।
टेस्ट करियर
वीरेंद्र सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट में सलामी बल्लेबाजी की अवधारणा को ही बदल दिया। उनकी “देखना और मारना” की रणनीति ने उन्हें टेस्ट क्रिकेट में सबसे खतरनाक सलामी बल्लेबाजों में से एक बना दिया।
- धाकड़ शुरुआत: अपने पहले टेस्ट शतक के बाद, उन्होंने जल्द ही खुद को एक नियमित सलामी बल्लेबाज के रूप में स्थापित कर लिया। उन्होंने अनिल कुंबले, हरभजन सिंह और सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज स्पिनरों के खिलाफ भी खुलकर बल्लेबाजी की।
- दो तिहरे शतक: सहवाग पहले भारतीय बल्लेबाज थे जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक (300 रन) जड़ा। उन्होंने मार्च 2004 में पाकिस्तान के खिलाफ मुल्तान में 309 रन बनाए। चार साल बाद, मार्च 2008 में, उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चेन्नई में 319 रन बनाकर अपना दूसरा तिहरा शतक लगाया, जो भारतीय बल्लेबाजों द्वारा टेस्ट क्रिकेट में बनाया गया सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है। वह सर डॉन ब्रैडमैन, ब्रायन लारा और क्रिस गेल के बाद टेस्ट में दो तिहरे शतक लगाने वाले दुनिया के चौथे बल्लेबाज बन गए।
- आक्रामक शैली: सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट में एक तेज़ गति से रन बनाने वाले बल्लेबाज के रूप में अपनी पहचान बनाई। उनका स्ट्राइक रेट अक्सर एक दिवसीय मैचों से मिलता-जुलता था, जिससे विपक्षी गेंदबाजों पर हमेशा दबाव बना रहता था। उन्होंने कई बार पहले ही दिन शतक बनाए और टेस्ट मैच को रोमांचक बना दिया।
- महत्वपूर्ण पारियां: उन्होंने कई यादगार पारियां खेलीं, जिनमें 2003-04 ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 195 रन, श्रीलंका के खिलाफ 201* रन और इंग्लैंड के खिलाफ 2008 में 83 रनों की तेज पारी शामिल है, जिसने भारत को लक्ष्य का पीछा करने में मदद की।
वनडे करियर
वनडे क्रिकेट में भी सहवाग का प्रभाव जबरदस्त था। उनकी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी ने अक्सर भारतीय टीम को ठोस शुरुआत दी।
- ओपनिंग पार्टनरशिप: सचिन तेंदुलकर के साथ उनकी ओपनिंग साझेदारी विश्व क्रिकेट में सबसे सफल जोड़ियों में से एक थी। उन्होंने एक साथ कई शतक की साझेदारियां कीं।
- दोहरा शतक: दिसंबर 2011 में, सहवाग ने वेस्टइंडीज के खिलाफ इंदौर में 219 रन बनाकर एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में दोहरा शतक लगाने वाले दूसरे बल्लेबाज (सचिन तेंदुलकर के बाद) बन गए। यह उस समय वनडे क्रिकेट में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर था।
- विश्व कप प्रदर्शन: उन्होंने 2003, 2007 और 2011 विश्व कप में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। 2011 विश्व कप में भारत की ऐतिहासिक जीत में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, खासकर टूर्नामेंट की शुरुआत में धमाकेदार पारियां खेलकर।
टी20 अंतर्राष्ट्रीय करियर
टी20 अंतर्राष्ट्रीय में सहवाग का करियर उतना लंबा नहीं रहा, लेकिन जब भी उन्हें मौका मिला, उन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से प्रभाव डाला। वह 2007 में पहले टी20 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे।
20 अक्टूबर 2015 को, अपने 37वें जन्मदिन पर, वीरेंद्र सहवाग ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा की, जिससे एक शानदार युग का अंत हुआ।
आईपीएल करियर

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) ने वीरेंद्र सहवाग की आक्रामक बल्लेबाजी शैली के लिए एक आदर्श मंच प्रदान किया। उन्होंने इस लीग में अपनी छाप छोड़ी और कई रिकॉर्ड भी बनाए।
- दिल्ली डेयरडेविल्स (अब दिल्ली कैपिटल्स): आईपीएल के शुरुआती वर्षों में सहवाग दिल्ली डेयरडेविल्स (अब दिल्ली कैपिटल्स) के प्रमुख खिलाड़ी और कप्तान थे। उन्होंने 2008 से 2013 तक दिल्ली के लिए खेला। उनकी कप्तानी में टीम ने कुछ सफल अभियान चलाए और प्लेऑफ तक का सफर तय किया। सहवाग ने दिल्ली के लिए कई तूफानी पारियां खेलीं, जिसमें 2011 में डेक्कन चार्जर्स के खिलाफ 119 रनों का उनका एकमात्र आईपीएल शतक भी शामिल है। उन्होंने अपनी टीम को विस्फोटक शुरुआत प्रदान की और दर्शकों का खूब मनोरंजन किया।
- किंग्स इलेवन पंजाब (अब पंजाब किंग्स): 2014 में, वीरेंद्र सहवाग को किंग्स इलेवन पंजाब (अब पंजाब किंग्स) ने खरीदा। उन्होंने इस टीम के लिए भी अपनी आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखी। 2014 आईपीएल सीज़न में, उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ क्वालीफायर 2 में सिर्फ 58 गेंदों में 122 रनों की शानदार पारी खेली, जो उनके आईपीएल करियर का दूसरा शतक था और टीम को फाइनल में पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
आईपीएल में सहवाग का रिकॉर्ड हमेशा प्रभावशाली रहा। उन्होंने अपनी निडर बल्लेबाजी से कई मैच जिताए और युवा खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा बने। कुल मिलाकर, आईपीएल में उन्होंने 104 मैच खेले, जिसमें 2728 रन बनाए, जिसमें 2 शतक और 16 अर्धशतक शामिल हैं। उनकी स्ट्राइक रेट हमेशा 150 के आसपास रही, जो टी20 प्रारूप के लिए आदर्श है।
रिकॉर्ड्स
वीरेंद्र सहवाग ने अपने करियर में कई अद्वितीय रिकॉर्ड बनाए, जो उन्हें क्रिकेट इतिहास के महानतम बल्लेबाजों में से एक बनाते हैं।
- टेस्ट क्रिकेट में दो तिहरे शतक: वह सर डॉन ब्रैडमैन, ब्रायन लारा और क्रिस गेल के बाद टेस्ट क्रिकेट में दो तिहरे शतक लगाने वाले दुनिया के केवल चौथे बल्लेबाज हैं।
- भारतीय द्वारा टेस्ट में सर्वोच्च स्कोर: उनका 319 रन का स्कोर (दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ, 2008) टेस्ट क्रिकेट में किसी भारतीय द्वारा बनाया गया सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है।
- टेस्ट में सबसे तेज तिहरा शतक: सहवाग ने 278 गेंदों में तिहरा शतक पूरा किया, जो टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे तेज तिहरा शतक है।
- वनडे में दोहरा शतक: वह सचिन तेंदुलकर के बाद एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में दोहरा शतक (219 रन बनाम वेस्टइंडीज, 2011) लगाने वाले दूसरे बल्लेबाज थे।
- टेस्ट करियर में 250 से अधिक का स्कोर: उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में चार बार 250 या उससे अधिक का स्कोर बनाया, जो किसी भी भारतीय बल्लेबाज द्वारा सबसे अधिक है।
- टेस्ट में सबसे तेज 200, 250, 300: सहवाग टेस्ट में सबसे तेज 200, 250 और 300 रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाज हैं।
- बतौर कप्तान वनडे में दोहरा शतक: वह कप्तान के रूप में वनडे में दोहरा शतक लगाने वाले एकमात्र बल्लेबाज हैं।
- टेस्ट में 8000+ रन और 90+ स्ट्राइक रेट: टेस्ट क्रिकेट में 8000 से अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाजों में से, सहवाग एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिनका करियर स्ट्राइक रेट 80 से अधिक (90 से अधिक, वास्तव में 82.23) है, जो उनकी आक्रामक शैली का प्रमाण है।
यहां उनके कुछ प्रमुख करियर आँकड़े दिए गए हैं:
| प्रारूप | मैच | रन | औसत | स्ट्राइक रेट | शतक | दोहरे शतक | तिहरे शतक |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| टेस्ट | 104 | 8586 | 49.34 | 82.23 | 23 | 6 | 2 |
| वनडे | 251 | 8273 | 35.05 | 104.33 | 15 | 1 | 0 |
| टी20I | 19 | 394 | 21.88 | 145.38 | 0 | 0 | 0 |
पुरस्कार
वीरेंद्र सहवाग को उनके उत्कृष्ट क्रिकेट करियर के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।
- अर्जुन पुरस्कार (2002): भारत सरकार द्वारा खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए दिया जाने वाला यह पुरस्कार उन्हें 2002 में प्रदान किया गया।
- पद्म श्री (2010): भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म श्री से उन्हें 2010 में सम्मानित किया गया, जो भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान को दर्शाता है।
- आईसीसी टेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर (2004): अपनी धमाकेदार टेस्ट बल्लेबाजी के लिए, उन्हें 2004 में ICC द्वारा वर्ष का सर्वश्रेष्ठ टेस्ट खिलाड़ी चुना गया।
- विजडन लीडिंग क्रिकेटर इन द वर्ल्ड (2008, 2009): सहवाग ने लगातार दो बार (2008 और 2009) विजडन लीडिंग क्रिकेटर इन द वर्ल्ड का खिताब जीता, जो उनकी वैश्विक बल्लेबाजी प्रतिभा का प्रमाण है।
इनके अलावा, उन्होंने कई मैन ऑफ द मैच और मैन ऑफ द सीरीज पुरस्कार भी जीते, जो उनकी खेल में निरंतरता और मैच विजेता प्रदर्शन को दर्शाते हैं।
पत्नी / गर्लफ्रेंड
वीरेंद्र सहवाग ने 22 अप्रैल 2004 को आरती अहलावत से शादी की। यह शादी एक भव्य समारोह में हुई थी, जिसमें खेल और राजनीति की कई हस्तियां शामिल हुई थीं। आरती सहवाग की बचपन की दोस्त और रिश्तेदार भी थीं। इस दंपति के दो बेटे हैं – आर्यवीर सहवाग (जन्म 2007) और वेदांत सहवाग (जन्म 2010)। सहवाग हमेशा अपने परिवार के साथ मजबूत रिश्ते में रहे हैं और अपनी पत्नी और बच्चों को अपनी सफलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
नेट वर्थ
वीरेंद्र सहवाग की कुल संपत्ति (नेट वर्थ) विभिन्न स्रोतों से आती है, जिसमें उनका क्रिकेट करियर, विज्ञापन, ब्रांड एंडोर्समेंट, कमेंट्री और उनका अपना अंतर्राष्ट्रीय स्कूल शामिल है। अनुमान के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति लगभग 45 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 370-380 करोड़ भारतीय रुपये) है। संन्यास के बाद भी, सहवाग विभिन्न ब्रांडों से जुड़े हुए हैं और एक लोकप्रिय कमेंटेटर और क्रिकेट विशेषज्ञ के रूप में सक्रिय हैं। वह ‘सहवाग इंटरनेशनल स्कूल’ के संस्थापक भी हैं, जो शिक्षा और खेल के क्षेत्र में योगदान देता है, जिससे उनकी आय में और वृद्धि होती है।
रोचक तथ्य
वीरेंद्र सहवाग का व्यक्तित्व उनके खेल जितना ही अनूठा और रोचक है। उनके बारे में कुछ दिलचस्प तथ्य यहां दिए गए हैं:
- नजफगढ़ का नवाब: उन्हें “नजफगढ़ का नवाब” के नाम से जाना जाता है, क्योंकि वे दिल्ली के नजफगढ़ से आते हैं और उनकी बल्लेबाजी में एक शाही अंदाज़ था।
- क्रिकेट में देरी: उन्होंने 1999 में अपना वनडे डेब्यू किया, लेकिन टेस्ट डेब्यू के लिए उन्हें 2001 तक इंतजार करना पड़ा।
- गाने गाते हुए बल्लेबाजी: सहवाग अक्सर बल्लेबाजी करते समय गाने गाते थे, खासकर जब वह बड़ी पारियां खेल रहे होते थे। उनका मानना था कि इससे उन्हें ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती थी।
- मिल का पत्थर छक्के से: वीरेंद्र सहवाग अक्सर अपने शतक, दोहरा शतक और तिहरा शतक छक्के मारकर पूरा करते थे। यह उनकी निडर बल्लेबाजी शैली का एक ट्रेडमार्क बन गया था। उन्होंने तीन बार छक्का लगाकर तिहरा शतक पूरा किया।
- गैर-पारंपरिक तकनीक: उनकी बल्लेबाजी तकनीक हमेशा किताबों के अनुसार नहीं रही है। वह बिना फुटवर्क के गेंद को हिट करने की अपनी क्षमता के लिए जाने जाते थे, जो उन्हें अन्य बल्लेबाजों से अलग करता था।
- कोच का प्रभाव: उनके बचपन के कोच अमर नाथ शर्मा ने उन्हें अपनी प्राकृतिक आक्रामक शैली को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया, जो उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
- पार्ट-टाइम ऑफ-स्पिनर: अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने कुछ समय के लिए पार्ट-टाइम ऑफ-स्पिन गेंदबाजी भी की और कुछ महत्वपूर्ण विकेट भी लिए।
- संन्यास के बाद का करियर: अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद, वह एक सफल क्रिकेट कमेंटेटर, विश्लेषक और ट्विटर पर अपनी हास्यपूर्ण टिप्पणियों के लिए प्रसिद्ध हुए।
- सहवाग इंटरनेशनल स्कूल: उन्होंने हरियाणा के झज्जर में सहवाग इंटरनेशनल स्कूल की स्थापना की है, जहाँ वे शिक्षा के साथ-साथ क्रिकेट प्रशिक्षण भी प्रदान करते हैं।
सामान्य प्रश्न (FAQs)
वीरेंद्र सहवाग का उपनाम क्या है?
वीरेंद्र सहवाग को “नजफगढ़ का नवाब” और “वीरू” जैसे उपनामों से जाना जाता है। उनके खेल की आक्रामक शैली और दिल्ली के नजफगढ़ से उनके संबंध के कारण उन्हें यह उपनाम दिए गए थे।
वीरेंद्र सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट में कितने तिहरे शतक लगाए हैं?
वीरेंद्र सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट में दो तिहरे शतक लगाए हैं। उन्होंने 2004 में पाकिस्तान के खिलाफ 309 रन बनाए और फिर 2008 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 319 रन बनाकर यह उपलब्धि हासिल की।
वीरेंद्र सहवाग ने वनडे में दोहरा शतक कब और किसके खिलाफ लगाया था?
वीरेंद्र सहवाग ने 8 दिसंबर 2011 को वेस्टइंडीज के खिलाफ इंदौर में एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैच में दोहरा शतक (219 रन) बनाया था। वह सचिन तेंदुलकर के बाद वनडे में दोहरा शतक बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज बने थे।
वीरेंद्र सहवाग ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से कब संन्यास लिया?
वीरेंद्र सहवाग ने अपने 37वें जन्मदिन, 20 अक्टूबर 2015 को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा की थी, जिससे उनके शानदार करियर का अंत हुआ।
वीरेंद्र सहवाग की पत्नी का नाम क्या है और उनके कितने बच्चे हैं?
वीरेंद्र सहवाग की पत्नी का नाम आरती अहलावत है। उनके दो बेटे हैं, जिनका नाम आर्यवीर सहवाग और वेदांत सहवाग है।
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